विदेशी पर्यटकों ने लिया आनन्द नदी स्नान व सोनपुर मेला का

विदेशी पर्यटकों ने लिया आनन्द नदी स्नान व सोनपुर मेला का,विदेशी सैलानीयों मे पशु मेला व पक्षी बाजार तथा हाथियों के झुंड नहीं देखने का मलाल दिखा,बोले जिसके लिये है मशहूर वही नही दिखा
लोगों तथा पदाधिकारियों के स्वागत से खुश दिखे सैलानी पुनः आने का किया वादा

विश्व प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला में अपने दो दिनों के प्रवास के बाद शनिवार को तीसरे दिन जापान के सभी सात सैलानी अपने वतन को लौट गए.मेला का आरंभ 21 नवंबर को हुआ और 22 नवंबर को जापानी सैलानी सोनपुर मेला के पर्यटक ग्राम पहुंचे
जापान से पहुंचे सभी सैलानियों ने सोनपुर में आस्था की डुबकी भी लगाया और खूब तस्वीरें भी ली.स्नान के लिए एक बार इतने लोगों को उमड़ते देख वे लोग काफी हतप्रभ थे और अपने अनुवादक से इस संबंधित खूब सवाल पूछ रहे थे.कार्तिक पूर्णिमा की भीड़ देखकर वे लोग खूब दंग थे.स्नान के बाद उनलोगों ने मेला में पहुंचे एकलौते हाथी के साथ खूब तस्वीर भी लिया और हरिहर नाथ मंदिर पहुँचकर मंदिर के धार्मिक इतिहास की भी जानकारी प्राप्त की.

अनुवादक की मदद से हुई बातचीत में टोक्यो की 77 वर्षीय योजो आकामोटो ने बताया कि उनके देश में लोग इंडिया के सोनपुर मेला को कैटल फेयर के रूप में जानते हैं और इसी पशु मेला को घूमने के उद्देश्य से वे लोग जापान के विभिन्न प्रांतों से सोनपुर पहुंचे, मगर पक्षी बाजार नहीं होने से उनलोगों को काफी निराशा हुई तो मेला में हाथियों का झुंड न देखने का भी उनलोगों का काफी मलाल है.जापान के ओसाका की 66 वर्षीय तकाको ओनिशी का कहना था कि मेला के अस्तित्व को बचाए रखने के लिए सरकार को पक्षी व पशु बाजार को संवारने का प्रयास करना चाहिए अन्यथा आने वाले समय में मेला में विदेशियों के आने का प्रतिशत निरंतर कम होगा और ग्लोबल फेयर के रूप में मशहूर सोनपुर मेला एक रीजनल फेयर बनकर रह जायेगा.जापानी पर्यटकों का दल 22 नवम्बर कुछ वक्त आराम करने के बाद वे लोग मेला घूमने निकल पड़े.देर शाम तक सबों ने मेला का आनंद लिया और घोड़ा बाजार,बकरी बाजार व गाय बाजार में लंबा वक़्त गुजारा.इस घूमने के दौरान सबों के खूब फोटो लिया तो कई घोड़ों के साथ तस्वीर लेते देखे गए.कुछ जापानी सैलानियों को गुड़ की जलेबी का भी आनंद उठाते देखा गया.जलेबी का स्वाद उनलोगों के लिए अनोखा व उत्तम था.

मेला में जिस क्षेत्र में जापानी सैलानी जाते तो मेला घूमने आए दर्शनार्थी उनलोगों को उत्सुकता की नजर से देखते थे.कई जगहों पर स्थानीय लोगों के साथ विदेशी सैलानियों ने सेल्फी भी ली तो कुछ जगहों पर स्थानीय लोगों के सेल्फी लेने के आग्रह को सैलानी टाल नहीं सके.हालाँकि कई बार सेल्फी लेने में ज्यादा वक़्त लगने पर उनलोगों में से कुछ को नाराज होते भी देखा गया.
दो दिनों के मेला के ठहराव के दौरान सभी जापानी सैलानियों ने मेला का भरपूर आनंद लिया और अपनी इस यात्रा को यादगार बनाने की हरसंभव कोशिश भी की.उनलोगों ने मेला के ऐतिहासिक व धार्मिक महत्त्व को जाना और मेला में हुए इंतजाम पर संतोष जाहिर किया.मेला घूमने के दौरान उनलोगों को मेला में कई ऐसे चीज मिले जो उनलोगों के लिए बिल्कुल नया था.अपने अनुवादक के सहारे उनलोगों ने मेला में अनजान दिखने वाली उन चीजों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की और कई चीजों को खरीदकर उन चीजों को अपने देश ले गये ताकि सोनपुर मेला की उनकी यह यात्रा सबों के यादगार बन सके.मेला का हर चप्पा घूमकर उनलोगों ने अपने कैमरों में कई तस्वीरों को कैद किया तो सरकारी प्रदर्शनियों को निहारते भी देखे गए.जापान से सोनपुर मेला घूमने आने वाले

सैलानीयो मे यासुनारी नाकामुरा (41 वर्ष ),फकुओका योजो ओकामोटो (77 वर्ष ) ,टोक्यो फुकिको अदाची (71 वर्ष) ,कानागवा
हाजिमे ताशिरो(46 वर्ष) चिबा तकाको ओनिशी (66 वर्ष) ,ओसाका युकियो वतानाबे (64 वर्ष) ,कानागवा
मकिको मात्सुदा (60 वर्ष) ऐची शामिल थी,
शनिवार को फिर मेला आने के वायदे के साथ वे लोग जापान रवाना हो गए.पर्यटक ग्राम के प्रभारी सुमन कुमार ने फिर मेला आने के आग्रह के साथ उनलोगों को विदा किया.तो वही पर्यटक ग्राम प्रबंधक सुमन कुमार ने बताया कि मेला में घूमने आने वाले विदेशी सैलानी पशु मेला व पक्षी बाजार को देखने के उद्देश्य में सोनपुर मेला आते हैं और इसी लिए यह मेला मशहूर भी है.मगर जब विदेशी सैलानियों को यह सभी चीज देखने को नहीं मिलता है तो उनलोगों को निराशा हाथ लगती है.इस साल मेला पहुंचे सात जापानी सैलानियों के अंदर भी हाथियों के झुंड नहीं देखने का मलाल दिखा.

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