1000 टन बालू से भगवान बुद्ध की प्रतिमा बना बुद्ध जयंती मनाई

राजीव रंजन कुमार / घोड़ासहन पूर्वी चंपारण :आज 18 मई को बुद्ध पूर्णिमा है जिसे वैशाख पूर्णिमा भी कहा जाता है वैशाख पूर्णिमा पर विष्णु के अवतार भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था।और इस दिन को भगवान बुद्ध की जयंती के रूप में मनाई जाती है।

बौद्ध धर्म और हिन्दू धर्म के अनुयायी इस दिन को बहुत ही खास तरह से मनाते हैं महात्मा बुद्ध बौद्ध धर्म के संस्थापक है। बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर पूर्वी चंपारण जिले के घोड़ासहन में मशहूर सैंड आर्टिस्ट मधुरेन्द्र ने अपनी अनोखें अंदाज में भगवान गौतम बुद्ध के जयंती मना रहे हैं। उन्होंने शनिवार को 1000 टन बालू पर भगवान बुद्ध की जीवन को चरितार्थ करते विशालकाय प्रतिमा उकेर लोगों को बुद्धम शरणं गच्छामि का संदेश दे रहें हैं।

बता दे कि भगवान बुद्ध ने लोगों से कहा था एक जलते हुए दीपक से हजारों दीपक रोशन किए जा सकते हैं।
फिर भी उस दीपक की रोशनी कम नहीं होती है।
उसी तरह खुशियां बांटने से बढ़ती हैं, कम नहीं होती हैं।

बुराई भी होनी चाहिए ताकि अच्छाई उसके ऊपर अपनी पवित्रता साबित कर सके।
स्वास्थ्य सबसे बड़ा उपहार है, संतोष सबसे बड़ा धन है, वफादारी सबसे बड़ा संबंध है।
सैंड आर्टिस्ट मधुरेन्द्र ने बताया कि तीन चीजें ज्यादा देर तक नहीं छुप सकतीं सूर्य, चंद्रमा और सत्य।
शक की आदत से भयावह कुछ भी नहीं है।
शक लोगों को अलग करता है। यह एक ऐसा जहर है जो मित्रता खत्म करता है और अच्छे रिश्तों को तोड़ता है।
मौके पर उपस्थित प्रबुद्ध नागरिकों सहित सैकड़ों लोगों ने मधुरेन्द्र की कलाकृति की सराहना करते कहा कि जैसे मोमबत्ती बिना आग के नहीं जल सकती, मनुष्य भी आध्यात्मिक जीवन के बिना नहीं जी सकता हैं।

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