दिल्ली एम्स में ऑपरेशन कराना हो तो तीन से चार साल बाद आपका नम्बर आएगा। इस बात पर हंसना नहीं रोना है।। – siwanexpressonline
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दिल्ली एम्स में ऑपरेशन कराना हो तो तीन से चार साल बाद आपका नम्बर आएगा। इस बात पर हंसना नहीं रोना है।।

दिल्ली एम्स में ऑपरेशन कराना हो तो तीन से चार साल बाद आपका नम्बर आएगा। इस बात पर हंसना नहीं रोना है।।

दुर्योग से आप पूर्वांचल या बिहार के किसी कोने में रहते हैं तो मात्र ECHO और MRI कराने के लिये भोर में चार बजे वाली ट्रेन पकड़ कर बनारस या गोरखपुर या पटना आना होगा।

किसी रात को राह चलते आपको गाड़ी ने धक्का मार दिया या गम्भीर रूप से बीमार हो गए तो बलिया सदर अस्पताल के डॉक्टर सीधे आपको बीएचयू रेफर करेंगे। सिवान वाला पटना रेफर करके अपना बला काट लेगा।। बीच रास्ते में आपको डॉक्टर नहीं,ईश्वर ही बचा सकतें हैं। किस्मत सही रही तो पहुच जाओगे नही तो अधिकतर एम्बुलेंस आधे रास्ते से वापस आ जाते है।।

जैसे ही आप मरीज़ लेकर महामना की पावन भूमि में बने BHU के अस्पताल में प्रवेश करेंगे,भीड़ देखकर आप ख़ुद को बीमार महसूस करने लगेंगे।

अगर एक्सीडेंट हुआ है तो ट्रामा सेंटर आपको भेजा जाएगा। सम्भव है आपका सौभाग्य काम करे और आपको खाली बेड मिल जाए,वरना फर्श पर भी आपका इलाज़ शुरू हो सकता है।

कुछ देर बाद आपको पता चलेगा कि यहाँ मरीज़ के साथ कम से दो आदमी लेकर आना चाहिए था। नहीं तो खोजते रहिये,पूछते रहिये, “भइया ये वाला टेस्ट कहाँ होगा ? ये वाले डॉक्टर कहाँ हैं ?

आप देखेंगे कि दुर्व्यवस्था इतनी है और मेडिकल विभागों में तालमेल का इस कदर अभाव है कि आपको एक बार पर्ची कटाने के लिए तीन घण्टे लाइन में लगना पड़ेगा..

फिर उसी पर्ची को डॉक्टर के पास जमा करने के लिए दो घण्टे और लाइन में लगना होगा। तब जाकर एक छोटे कागज पर लिखा आपको आपका नम्बर मिलेगा।

अब करिये अपनी बारी का इंतज़ार..

आप अपने नम्बर को बेताबी से देखते जाएँगे। वहीं दूसरी तरफ़ कुछ वीआईपी लोग आते जाएंगे और आपके सामने ही बड़े शान से दिखाकर चलते जाएंगे।

आप गुस्सा होंगे,परेशान होंगे। सम्भव है आप रो दें लेकिन अपने नम्बर का इंतज़ार जरूर करेंगे।

मान लें सौभाग्य से डॉक्टर ने आपको देखकर जाँच लिख दिया तो और आफ़त है।

अब या तो आप जाँच के लिए बाहर जाइये और दो गुना तीन गुना ज्यादा पैसे देकर जाँच करवाइए। या फिर इस अस्पताल में जाँच के लिए जुगाड़ लगाइये।

आपको पता चलेगा एक एमआरआई कराना हो तो तीन महीने बाद आपका नम्बर आएगा। कुछ जाँच की रिपोर्ट आपको एक दो दिन में मिल जाएगी। कुछ की रिपोर्ट आने में महीनों भी लग सकतें हैं। और सिर्फ़ इतना ही नहीं जाँच की पर्ची कटाने और फीस जमा करने के लिए दो घण्टे लाइन में लगना भी पड़ सकता है।

अब आप काउंटर पर जाकर पता करेंगे तो आपको पान थूकता और सरकारी नौकरी को एंज्वॉय करता एक अधेड़ आदमी बड़े ही भारी मन से बताएगा कि, “बेटा जाँच भले यहाँ हुआ है लेकिन यहाँ से चार सौ मीटर दूर आपको रिपोर्ट मिलेगी।”

अब खोजिये आप..

अगर बलिया,गाजीपुर,मऊ,आजमगढ़,बक्सर,छपरा,सिवान गोपालगंज ,रोहतास,भभुआ और चंपारण से लेकर गया से आप आएं हैं तो आपको समझ आएगा कि मरीज़ के साथ हम भी बीमार पड़ते जा रहें हैं और कुछ दिन ऐसा ही चला तो खून में आयरन की कमी होनी तय है।

आज आप ध्यान से देखें तो ये सिर्फ बीएचयू की विडंबना नहीं है। गोरखपुर हो या पटना के PMCH या पूर्वांचल और बिहार का कोई अस्पताल हो ।।सारे सरकारी अस्पतालों का हाल यही है। इनको देखकर लगता है कि हम आज भी उन्नीस सौ साठ में जी रहें हैं। और कुछ सरकारी लोग इस मेडिकल सिस्टम को केवल तनख्वाह के लिए बस ढ़ो रहें हैं।

लेकिन इस ढ़ोने के चक्कर में मर कौन रहा है ?

वही आम आदमी और ग़रीब

कल से मुजफ्फरपुर का हाल देखकर मेरा मन खिन्न है। देख रहा सफ़ेद पोश लोग प्रेस कांफ्रेंस में क्रिकेट का स्कोर पूछ रहे हैं। कुछ लोगों को नींद आ रही है। वहीं दूसरी तरफ़ हजारों परिवार चिल्ला रहे हैं तड़प रहें हैं। चारो ओर मातम ही मातम है।

समझ नहीं आता कि देश में ये सब कब तक चलेगा..?

मानते हैं कि ‘आयुष्मान भारत योजना’ ने बड़ा सहारा दिया है। लेकिन इसमें बदौलत स्वस्थ भारत का ढोल नहीं पीटा जा सकता। इससे बस चुनाव जीते जा सकतें हैं,मूलभूत सुधार नहीं हो सकते।

आज इंडियन मेडिकल सिस्टम को बहुत बड़े सर्जरी की जरूरत है। वरना आप ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी और अंतरिक्ष में सुपर पॉवर बनकर क्या करेंगे ? जब मुजफ्फरपुर में भावी भारत असमय मरता रहेगा।

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