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इन गुरुओं ने बढ़ाया बिहार का मान

इन गुरुओं ने बढ़ाया बिहार का मान

भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊपर रखा गया है। मंगलवार को गुरु पूर्णिमा है। गुरुओं को समर्पित इस दिन का खास महत्व है। आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान ने इस दिन राजधानी के उन गुरुओं को याद किया है, जिन्होंने अथक प्रयास से न जाने कितनों का जीवन संवार दिया। इन्होंने न केवल समाज के निचले तबके से आने वाले बच्चों की तकदीर बदली बल्कि कितनी ही प्रतिभाओं को उचित मार्गदर्शन देकर उन्हें खास मुकाम भी दिलाया। प्रस्तुत है इन गुरुओं के योगदान को समर्पित खास रिपोर्ट…।

प्रो. केसी सिन्हा: गणित विषय पर लिख डालीं 65 किताबें
पटना सायंस कॉलेज के प्राचार्य प्रो केसी सिन्हा की प्रख्यात गणितज्ञ के रूप में देश विदेश में ख्याति है। अपने समर्पण और रोचक अध्यापन शैली के लिए इनकी छात्रों की बीच काफी लोकप्रियता है। इन्होंने गणित की 65 से अधिक पुस्तकें लिखकर इन्होंने अपने गणीतिय ज्ञान को उन छात्रों तक पहुंचाया जो पटना या बिहार से बाहर रह रहे हैं। इनमें अलजबरा, त्रिकोणमिति, कोर्डिनेट ज्योमेट्री सहित हर चैप्टर पर इनकी पुस्तकें गणित की उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों के लिए उपयोगी हैं। ये अमेरिकन मैथेमेटिकल सोसायटी के सदस्य भी हैं। इसके अलावा इंडियन सोसायटी ऑफ हिस्ट्री एंड मैथेमेटिक्स के सदस्य हैं। इन्होंने अभी तक गणित पर 40 हजार पेज लिख चुके हैं और गणित की पढ़ाई कर रहे रहे इनके शब्दों को मंत्र की तरह ग्रहण करते हैं। पटना विवि की महत्वपूर्ण कमेटी के अलावे वे कई बड़े कमिटी के सदस्य रहे हैं। इनका यह वाक्य छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय है – गणित बहुत ही आसान विषय है। मन से पढ़ाई हर कामयाबी मिलेगी। उनके छात्र उनसे पढ़कर खुद भी कहते हैं कि सचमुच गणित सबसे आसान विषय है।

प्रो. एसबी लाल: कमजोर छात्रों को भी आगे ले आते हैं
कॉमर्स विषय की पढ़ाई करने वाले छात्रों के बीच पटना विवि के प्रो. एसबी लाल का बड़ा नाम है। अपनी शिक्षण शैली और समर्पण की वजह से छात्रों के लिए बीच काफी लोकप्रिय हंै। छात्रों को एकाउंट, फाइनांस और टैक्सेसन की पढ़ाई में सहजता का बोध कराने की वजह से हाल के वर्षों में ख्याति बढ़ी है। अतिरिक्त समय देकर कमजोर छात्रों को अगली पंक्ति के छात्रों के बीच स्थापित करने की कला ने इन्हें लोकप्रिय शिक्षत बनाया। छात्रों के बीच इनके वर्ग कौशल का जादू ऐसा है कि कक्षाएं भरी रहती हैं। वे इंडियन कॉमर्स एसोसिएशन के एक्जक्यूटिव के इलेक्टेड सदस्य रह चुके हैं। साथ ही पटना विवि के शिक्षक एसोसिएशन के महासचिव व कोषाध्यक्ष भी रहे हैं। विवि की कई समितियों में काम करते हुए भी शिक्षण में किसी तरह कमी नहीं आने देते हैं।

डॉ. एम रहमान: चार हजार छात्रों को बना दिया दारोगा
शिक्षक डॉ. एम रहमान बिहार के निर्धन और मेधावी छात्रों के बीच खूब लोकप्रिय हैं। यों तो वे वर्ष 1994 से ही शिक्षण कर रहे हैं लेकिन उन्हें असली पहचान वर्ष 2004 में मिली। हजारों निर्धन छात्रों को महज 11 रुपए की फीस लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले डॉ. रहमान आज का जादू कुछ इस तरह का है कि उनके एक इशारे पर उनके छात्र समाजसेवा के क्षेत्र में टूट पड़ते हैं। यूपीएससी, बीपीएससी, रेलवे, सीपीओ, सीपीएस परीक्षाओं में मेधा को तराश कर शीर्ष पर पहुंचाने वाले डॉ. रहमान को दारोगाजी के गुरुजी के नाम से ही जाना जाता है। बिहार, झारखंड और यूपी में आज विभिन्न थानों में लगभग अदम्य अदिति गुरुकुल के 4000 छात्र दारोगा के पद पर कार्यरत हैं। डॉ. रहमान गंगा सफाई सहित समाज सेवा के कार्यों में भी लगे रहते हैं।

पूर्व डीजीपी अभयानंद: विद्यार्थियों के लिए समर्पित की जिंदगी
बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद रिटायरमेंट के बाद शिक्षा के क्षेत्र में नाम कमा रहे हैं। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने ‘अभ्यानंद सुपर-30’ की शुरुआत की। इसमें गरीब बच्चों को मुफ्त में आईआईटी के लिए कोचिंग कराई जाती है। सिर्फ तीन सालों में ही इस कोचिंग के 32 विद्यार्थियों का आईआईटी में दाखिला हो चुका है। वहीं 36 विद्यार्थियों का एनआईटी और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंटिफिक एंड एजुकेशनल रिसर्च में नामांकन हुआ है। अभ्यानंद खुद भौतिकी पढ़ाते हैं। वो इतने सर्वसुलभ हैं कि विद्यार्थी फोन कर के भी उनसे सवाल पूछ लेते हैं और उन्हें अपने सवाल का हल भी मिल जाता है। ‘सुपर-30’ के सह संस्थापक के रूप में भी अभ्यानंद ने काफी ख्याति बटोरी है।

डॉ. एसएन आर्या: मेडिकल छात्रों के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं
सूबे के चिकित्सा जगत में डॉ. एसएन आर्या ऐसा नाम है जिनसे हर साल मेडिकल छात्र-छात्राएं प्रेरणा लेने के लिए उनके घर या क्लिनिक में आते हैं। पटना मेडिकल कॉलेज में बतौर शिक्षक उनकी एक बात को उनके छात्र मंत्र की तरह लेते रहे। उन्होंने छात्र-छात्राओं को मरीज और डॉक्टर के बीच बेहतर रिश्ते को कायम रखने प्रेरणा दी। यही कारण है कि हर साल डॉक्टर्स डे पर सैकड़ों मेडिकल छात्र उनसे आशीर्वाद लेने पटना आते हैं। जब वे पीएमसी में एमबीबीएस के छात्र थे उस समय उनके पिताजी ने कहा था कि जब डॉक्टर बनना तो एक दिन गरीबों को नि:शुल्क उपचार करना। वे सप्ताह में एक दिन बगैर फीस लिए गरीब मरीजों का उपचार करते हैं। डॉ एसएन आर्या कहते हैं कि यदि आज भी सच्ची निष्ठा से छात्रों को शिक्षा दी जाए तो छात्र गुरु को भगवान की तरह मानते हैं।

आनंद कुमार: निचले तबके के बच्चों के पूरे किए सपने
देश दुनिया में अपने गणितीय कौशल का लोहा मनवाने वाले सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार ने कम समय में बड़ी ख्याति बटोरी। इन्होंने समाज के सबसे निचले वर्ग से आने वाले लगभग 500 गरीब बच्चों को देश के सर्वोच्च संस्थान आईआईटी तक पहुंचाया। जिन छात्रों की प्रतिभा आर्थिक तंगी की वजह से दम तोड़ रही थी अपने मार्गदर्शन से उन्होंने अहम भूमिका निभाई। आनंद कुमार ने जीवन की जिन कठिनाइयों का सामना किया उससे उबरने का तरीका भी छात्रों को बताया। अपने विशिष्ट शिक्षण कौशल और शानदार उपलब्धियों की वजह से इन्होंने कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय अवार्ड से नवाजा गया है। हाल ही में निर्देशक विकास बहल ने इनपर एक बायोपिक बनाई है। सिनेस्टार ऋतिक रोशन अभिनीत इस बायोपिक सुपर 30 के चर्चे आज हर जुबान हैं।

डॉ. बलराम तिवारी: हिन्दी को दिलायी खास पहचान
जब देश-दुनिया में हिन्दी के छात्रों की हंसी उड़ाने की कोशिश हो रही थी तो उन्हीं दिनों में पटना विवि के पूर्व कुलसचिव और शिक्षक डॉ. बलराम तिवारी ने हिन्दी पढ़ने वालों को विशेष पहचान दिलाई। प्रो. बलराम तिवारी के हजारों छात्रों ने सिविल सेवा और प्रांतीय सेवा की परीक्षाओं में हिन्दी को वैकल्पिक विषय लेकर प्रतिभा का परचम लहराया। बिहार, यूपी, मध्यप्रदेश और देश- दुनिया में अलग-अलग संस्थानों में सेवाएं दे रहे हैं। प्रो. बलराम तिवारी कहते हैं कि शिक्षक की सार्थकता उसके अध्यापन से ही है। हमेशा माताएं और भाषाएं बेटे-बेटियों से बड़ी होती हैं। कहते हैं कि आज उनकी ख्याति में उनके छात्रों का भी बड़ा योगदान है।

डॉ. रासबिहारी सिंह: अध्यापन शैली के दीवाने हैं छात्र
भूगोलवेत्ता और पटना विवि के कुलपति डॉ. रासबिहारी प्रसाद सिंह के भौगोलिक अध्ययन का कोई सानी नहीं। भूगोलशास्त्र में उनके शोधों और उनकी अध्यापन शैली के देशभर के छात्र दीवाने हैं। पीयू कुलपति के पद पर कार्य करते हुए वे आज भी स्नातकोत्तर की कक्षाओं में नियमित रूप से पढ़ाते हैं। प्रो. रासबिहारी सिंह कहते हैं कि एक शिक्षक का काम ईमानदारी से पढ़ाना है। किसी भी तरह का पद तो एक प्रकार का बोनस होता है लेकिन अध्यापन के जरिये छात्रों को संतुष्ट करने से बड़ा छात्र हित कुछ नहीं हो सकता। देश भर में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रहे उनके छात्र भी अपने इस शिक्षक के प्रति काफी सम्मान का भाव रखते हैं।

प्रो. अमरेंद्र मिश्र: रिटायरमेंट के बाद भी पढ़ाने आते हैं
पटना विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय के पूर्व डीन प्रो. अमरेंद्र मिश्र भी की छात्रों के श्रद्धेय हैं। प्रो. मिश्र जुलाई 2015 में सांख्यिकी विभाग से 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त हो गए लेकिन उनका अपने विभाग और विश्वविद्यालय से इतना लगाव है कि वे सेवानिवृत्ति के बाद भी नियमित रूप से रूटीन से पढ़ाने विभाग में आते हैं। पीयू में नि:शुल्क सेवाएं दे रहे अमरेन्द्र मिश्र के शिक्षण के छात्र कायल हैं। प्रो. मिश्र शोध में छात्रों की हर तरह से सहायता करते हैं। वे डॉक्टर, इंजीनियर और दूसरे शोधार्थियों को ट्रेनिंग देते हैं ताकि वो शोध से निकलनेवाले डाटा का एनालिसिस कर सकें। प्रो. मिश्र कई बार खुद भी डाटा का एनालिसिस कर देते हैं।

संतोष कुमार: ईशान को बनाया क्रिकेट का स्टार
क्रिकेट कोच संतोष कुमार ने भारतीय अंडर-19 टीम के कप्तान रहे ईशान किशन की प्रतिभा को बचपन में पहचान लिया था। उनसे सीखी क्रिकेट का बारीकियों से पटना के ईशान किशन भारतीय क्रिकेट जगत में अब जाना-पहचाना नाम बन चुका है। ईशान किशान अंडर -19 भारतीय क्रकेट टीम के कप्तान रह चुके हैं। आईपीएल में अभी वे मुंबई इंडियंस टीम के साथ जुड़े हैं। उसकी इस उपलब्धि के पीछे उनके क्रिकेट कोच संतोष कुमार का भी बड़ा योगदान है। राजेंद्रनगर शाखा मैदान में वाईसीसी क्रिकेट कोचिंग के मुख्य कोच संतोष कुमार ने बताया कि 2010 में लगभग 11 वर्ष की उम्र में उनके यहां क्रिकेट सीखने आए थे।

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