गठबंधन सरकार गिरी भाजपा पेश कर सकती है सरकार बनाने का दावा

गठबंधन सरकार गिरी भाजपा पेश कर सकती है सरकार बनाने का दावा

नई_दिल्ली : विश्वास प्रस्ताव पर चार दिनों की बहस के बाद कनार्टक में एच. डी. कुमारस्वामी की सरकार गिर गई है। विधानसभा में मंगलवार को मुख्यमंत्री कुमारस्वामी के नेतृत्व में कांग्रेस व जनता दल सेक्युलर (जद-एस) की गठबंधन सरकार विश्वास मत हासिल नहीं कर सकी। 225 सदस्यीय कनार्टक विधानसभा में विश्वास मत के लिए 20 विधायक सदन में उपस्थित नहीं हुए थे। विधानसभा अध्यक्ष के. आर. रमेश कुमार ने विश्वास मत के बाद सदन के सदस्यों को बताया कि मुख्यमंत्री एच. डी. कुमार स्वामी विश्वास मत हासिल नहीं कर सके। उन्होंने बताया कि विश्वास मत के पक्ष में 99 जबकि इसके खिलाफ 105 मत पड़े हैं। इसके साथ ही भाजपा ने कहा है कि वह कनार्टक में सरकार बनाने का दावा पेश करेगी। बताया जा रहा है कि सरकार बुधवार को सरकार बनाने का दावा पेश कर सकती है।

कुमारस्वामी की गिरी सरकार, विश्वासमत के पक्ष में पड़े सिर्फ 99 वोट

तो चलिए जानते हैं कर्नाटक के सियासत में क्या-क्या हुआ

  1. कर्नाटक मामले पर राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा, ” अपने पहले दिन से ही कांग्रेस-जद(एस) सरकार भीतर और बाहर के उन निहित स्वार्थ वाले लोगों के निशाने पर आ गयी थी जिन्होंने इस गठबंधन को सत्ता के अपने रास्ते के लिए खतरा और रुकावट के तौर पर देखा।” उन्होंने दावा किया, “उनके लालच की आज जीत हो गयी। लोकतंत्र, ईमानदारी और कर्नाटक की जनता हार गयी।”

  2. वहीं पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भाजपा पर संस्थाओं और लोकतंत्र को व्यवस्थित ढंग से कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ”एक दिन भाजपा को यह पता चलेगा कि सब कुछ नहीं खरीदा जा सकता, हर किसी के पीछे नहीं पड़ा जा सकता और हर झूठ आखिरकार बेनकाब होता है।”गौरतलब है कि कर्नाटक में कांग्रेस-जद(एस) की सरकार मंगलवार को विधानसभा में विश्वास मत हासिल करने में विफल रही और सरकार गिर गई। इसी के साथ राज्य में करीब तीन हफ्ते से चल रहे राजनीतिक नाटक का फिलहाल पटाक्षेप हो गया।

  3. कर्नाटक में कांग्रेस-जद(एस) गठबंधन की सरकार मंगलवार को विधानसभा में विश्वासमत हासिल करने में विफल रहने के बाद गिर गयी । इसी के साथ राज्य में 14 महीने से अस्थिरता के दौर का सामना कर रहे मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी का कार्यकाल खत्म हो गया। कुमारस्वामी ने विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव हारने के तुरंत बाद राज्यपाल वजूभाई वाला को अपना इस्तीफा सौंप दिया। अधिकारियों ने बताया कि परिणाम के तुरंत बाद कुमारस्वामी, उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर और अन्य वरिष्ठ सहयोगियों के साथ राजभवन गए और इस्तीफा सौंप दिया।

  4. कुमारस्वामी को अपने पत्र में राज्यपाल ने कहा, ”मैंने तत्काल प्रभाव से आपका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है । वैकल्पिक व्यवस्था होने तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री के पद पर बने रहिए। यह कहने की जरूरत नहीं है कि इस दौरान कोई कार्यकारी फैसले नहीं लिए जाने चाहिए।

  5. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने मंगलवार को कर्नाटक के मुद्दे पर पार्टी नेताओं के साथ विचार-विमर्श किया। शाह ने इन संकेतों के बीच पार्टी नेताओं के साथ सलाह मशविरा किया कि कर्नाटक में एच डी कुमारस्वामी नीत गठबंधन सरकार के मंगलवार को गिरने के बाद बी एस येदियुरप्पा मुख्यमंत्री पद के लिए भाजपा की पसंद हो सकते हैं। राज्य में शीर्ष पद के लिए भाजपा की पसंद के बारे में पूछे जाने पर पार्टी के एक नेता ने कहा कि येदियुरप्पा जाहिर तौर पर दावेदार हैं, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शाह सहित पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इस बारे में निर्णय करेगा।

  6. विधानसभा में पिछले बृहस्पतिवार को कुमारस्वामी ने विश्वास मत का प्रस्ताव पेश किया था। चार दिनों तक विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के बाद कुमारस्वामी ने कहा,”मैं खुशी से इस पद का बलिदान करने को तैयार हूं। कार्यवाही में 21 विधायकों ने हिस्सा नहीं लिया जिससे सदन की प्रभावी क्षमता घटकर 204 रह गयी। कार्यवाही में कांग्रेस-जदएस (17), बसपा (एक), निर्दलीय (दो) के विधायक नहीं आए। इस तरह 103 का जादुई आंकड़ा नहीं जुट पाया।

  7. कुमारस्वामी ने कहा कि विश्वास मत की कार्यवाही को लंबा खींचने की उनकी कोई मंशा नहीं थी। उन्होंने कहा, ”मैं विधानसभाध्यक्ष और राज्य की जनता से माफी मांगता हूं। कुमारस्वामी ने कहा, ”यह भी चर्चा चल रही है कि मैंने इस्तीफा क्यों नहीं दिया और कुर्सी पर क्यों बना हुआ हूं। उन्होंने कहा कि जब विधानसभा चुनाव का परिणाम (2018 में) आया था, वह राजनीति छोड़ने की सोच रहे थे।

  8. अपने संबोधन में कांग्रेस नेता सिद्धरमैया ने आरोप लगाया कि भाजपा रिश्वत और विधायकों की खरीद फरोख्त के जरिए सत्ता में आने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि 15 विधायकों का इस्तीफा और कुछ नहीं बल्कि यह खरीद फरोख्त है। सिद्धरमैया ने आरोप लगाया कि विधायकों को प्रलोभन देने के लिए 20, 25 और 30 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया गया । उन्होंने पूछा कि यह धन कहां से आया?

  9. मतदान के बाद विजय चिन्ह बनाते हुए भाजपा नेता बी एस येदियुरप्पा ने परिणाम को लोकतंत्र की जीत बताया। उन्होंने कर्नाटक के लोगों को आश्वस्त किया कि भाजपा के सत्ता में आने के साथ विकास का एक नया युग आरंभ होगा। अगले कदम पर येदियुरप्पा ने कहा कि शीघ्र ही उपयुक्त फैसला किया जाएगा। कुमारस्वामी सरकार के विश्वास मत के दौरान बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के विधायक के विधानसभा से गैरहाजिर रहने को पार्टी सुप्रीमो मायावती ने गंभीरता से लेते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से पार्टी से निष्कासित कर दिया है।

  10. कर्नाटक में 2018 में विधानसभा चुनाव के बाद 14 महीने में दो मुख्यमंत्री को विश्वास मत में हार के बाद सरकार गंवानी पड़ी है। कर्नाटक में मई में चुनाव के बाद भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी। चुनाव में भाजपा को 104 सीटें मिली थीं। जबकि कांग्रेस को 78 और जेडीएस को 37 सीट मिली थी। इसके बाद राज्यपाल ने भाजपा के येदियुरप्पा को सरकार बनाने का न्योता दिया था। पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वह बहुमत सिद्ध नहीं कर सके और मात्र छह दिन मुख्यमंत्री रहे।

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