कोरोना में सावधानी ही है बचाव

कोरोना में सावधानी ही है बचावPatna : कोरोना वायरस को लेकर ज्यादा भयभीत होने और भय का माहौल बनाने की जरूरत नहीं है। भारत के अलग-अलग राज्यों में बेशक इससे संक्रमित मरीज पाए गए हैं। लेकिन यह सभी आयुवर्ग के इंसानों पर एक समान प्रभाव नहीं डालता है।चीन में जहां से इसके प्रकोप की शुरुआत हुई, वहां अबतक एक लाख से अधिक लोग संक्रमित हुए हैं। लेकिन आंकड़े के मुताबिक इससे मृतकों की संख्या तीन हजार के आसपास ही है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सभी पीड़ितों की मौत नहीं होती है। 60 साल से अधिक आयुवर्ग के लोग, बीपी, शुगर, टीबी, अस्थमा, कैंसर आदि से पीड़ित लोगों जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है उनके लिए यह वायरस जानलेवा साबित होता है। देश में अभी उन्हीं लोगों में वायरस पॉजिटीव पाया गया है, जो दूसरे देश से आए हैं। इससे पहले केरल में आए पीड़ितों के ठीक होने में भी देश के डॉक्टरों को सफलता मिल चुकी है। इसलिए लोगों को कोरोना को लेकर ज्यादा भयभीत होने की जरूरत नहीं है। ये बातें राज्य के शीर्ष अस्पतालों के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने कहीं।हाथ की धुलाई व मास्क पहनें
कोरोना से जानवरों से फैलने वाले वायरस हैं। 1970 से ही चिकित्सा जगत में यह ज्ञात वायरस है। इसमें मृत्युदर 2 प्रतिशत से भी कम है। 60 साल से अधिक आयुवर्ग के लोग, बीपी, शुगर, टीबी, अस्थमा आदि से पीड़ित लोग जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है उनके लिए यह वायरस जानलेवा साबित होता है। दीवार, लिफ्ट, दरवाजे पर यह वायरस 48 घंटे तक जीवित रहता है। संक्रमित लोगों के संपर्क से दूरी बनाए रखना ही इस बीमारी से बचाव का सबसे अच्छा तरीका है। इसके लिए लोग एन-95 मास्क पहनें, हाथों की धुलाई करें, छिंकते समय नाक पर रूमाल रखें। अगर लोगों के नाक से पानी आ रहा है और छींक आ रही है तो यह कोराना का लक्षण नहीं है। लेकिन जब सूखी खांसी और गला जाम रहे, सांस लेने में तकलीफ हो तो तुरंत अस्पताल में डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। लोगों को गर्म पानी पीना चाहिए। एंटी बॉयटिक एकदम ना खाएं। अभी कोई वैक्सीन अथवा एंटी वायरल दवा इसका बाजार में नहीं आया है, अत: सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।
:- डॉ. एमपी सिंह, विभागाध्यक्ष, मेडिसिन विभाग, पीएमसीएच, पटना।सर्दी-खांसी, बुखार हो तो डॉक्टर से दिखाने में संकोच ना करें
कोरोना से बचाव के लिए एम्स पटना में भी मरीजों को और चिकित्सकों के बीच जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। थोड़ी सी जागरूकता से कोरोना के फैलाव को रोका जा सकता है। लोगों को दिन में कम से कम तीन से चार बार साबुन से हाथ की धुलाई करनी चाहिए। बस-ट्रक में सफर करते समय अपने नाक, मुंह को बढ़िया से ढंकें, छींकते या खांसते समय रूमाल रखें, ना हो तो अपने केहुनी को अपने मुंह पर रखें। अगर कोई व्यक्ति संक्रमित स्थल से आया हो तो उसको कम से कम 14 दिनों तक आइसोलेशन (अलग) रखें और उसके स्वास्थ्य की लगातार मॉनिटरिंग करें। सर्दी5खांसी, बुखार जैसे सामान्य लक्षण हो तब भी डॉक्टर से मिलकर दवा लें।
– डॉ. अनिल कुमार, वरीय चिकित्सक, एम्स पटना।विदेश से आनेवाले संदेहास्पद की हो खास निगरानी
कोरोना की कोई दवा अबतक नहीं मिल पाई है। लेकिन भारत के केरल में इसके पॉजीटिव मरीज की सफलतापूर्वक इलाज किया जा चुका है। भारत की परिस्थिति चीन से अलग है। यहां इस बीमारी पर विजय पायी जा सकती है। बाहर से आनेवाले संक्रमित लोगों की सही मॉनिटरिंग हो, इलाज के साथ उनका सही रख-रखाव हो तो संक्रमित मरीज भी ठीक हो सकता है। कुछ ऐसी दवाएं हें जो वायरस पर असर करती है, डॉक्टर की सलाह से पीड़ित व्यक्ति उसे ले सकता है। हाथ की सफाई, अल्कोहलिक हैंड रब का इस्तेमाल और एन-95 मास्क पहनकर ही लोगों को घरों से बाहर निकलना चाहिए। भीड़भाड़वाली जगह से अभी बचना चाहिए।
– डॉ. बिकास सौरभ, पारस, एचएमआरआई, अस्पताल, पटना।बुजुर्गों व बच्चों को बचाव पर दें विशेष ध्यान
कोरोना वायरस मानव से मानव में तेजी से फैलता है। इससे सभी लोग संक्रमित हो सकते हैं, लेकिन बच्चे, बजुर्गों व क्रॉनिक बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए यह घातक होता है। अत: बच्चों व बुजुर्गों के लिए विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। इस बीमारी का अबतक कोई पुख्ता इलाज नहीं मिलने के कारण यह परेशानी का कारण बन गया है। ऑक्सीजन थेरेपी, नाक से निकलनेवाले स्त्राव प्रबंधन, जरूरत पड़े तो वेंटिलेशन की मदद से पीड़ित मरीज की जिंदगी को बचाई जा सकती है। विदेशों से आनेवाले लोगों के संपर्क से बचना चाहिए। बीमार लोगों के संपर्क में आने से बचें, आना पड़े तो सावधानी बरतें, हाथ की सफाई और खान-पान में सावधानी बरतें। ज्यादा मांसहारी भोजन की बजाय शाकाहारी और पौष्टिक भोजन करें।
– डॉ. प्रफुल्ल दीपांकर, आईजीआईएमएस।होम्योपैथी में है सभी तरह के वायरल बीमारियों की दवा
कोरोना वायरल जनित बीमारी है और होम्योपैथी में सभी तरह के वायरल बीमारियों का इलाज किया जा सकता है। कई ऐसी दवाएं हैं जो वायरल बीमारियों पर सटीक असर करती हैं। सर्दी, खांसी, बुखार जैसी वायरल बीमारियां होम्योपैथिक की कुछ विशेष दवाओं से एक से दो दिन में पूरी तरह ठीक हो जाती है। एक चिकित्सक कुछ दवाओं का मिश्रण बनाकर कोरोना का भी प्रभावी इलाज कर सकता है। कुछ सावधानी जैसे हाथ की सफाई, मास्क पहनकर निकलने और भीड़-भाड़वाले इलाके में जाने से बचना चाहिए।
– डॉ. महेश प्रसाद, होम्योपैथिक विशेषज्ञ,आयुर्वेद से हो सकता है कोरोना से बचाव
अभी जो कोरोना का कहर है, आयुर्वेद में उसे जनोपदोध्वंस कहा जाता है। यह एक महामारी है जो कतिपय खान-पान, रहन-सहन की विकृति के कारण होता है। जिन कारणों से ये बीमारी हुआ है उसको हटाकर यानि निदान परिवर्जन कर इससे मुक्ति पाई जा सकती है। सर्दी, खांसी, बुखार जैसे सामान्य इन्फ्लूएंजा जैसे लक्षण कोरोना के भी हैं। आयुर्वेद का मूलमंत्र है जो रोगी है स्वस्थ किया जाए और जो स्वस्थ है उसका चाव किया जाए। कोरोना चे बचाव के लिए ताजा खाना खाएं, बासी एकदम ना खाएं, संक्रमित लोगों से दूर रहें, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम है वे उसे बढ़ाने के लिए तुलसी, गिलोय, आंवला, अदरख, लहसून आदि का सेवन करें। स्वस्थ व्यक्ति व बच्चे भी तुलसी पत्ता, काली मिर्च और अदरख का काढ़ा लगातार पीते रहें। घर कावातावरण शुद्धकरने के लिए घरों में धूप जलाएं। धूप में जटामासी, गुगुल, चंदन, राल आदि जलाएं। आयुर्वेद में पंचकर्म ऐसी पद्धति है जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता में काफी वृद्धि होती है। नस्य कर्म में नाक से दवाइयां डाली जाती हैं। पूर्व की धार्मिक व्यवस्था से दूरी बनाने से भी समाज में संक्रमण फैल रहा है। पहले धूप, हवन आदि अनुष्ठान होने से घर में संक्रमण नहीं फैलता था।
– डॉ. दिनेश्वर प्रसाद, प्राचार्य, राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय, पटना।

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