पाला बदलने में माहिर रहे हैं बिहार के नेता विपक्षी दलों में दलबदल का पुराना इतिहास

पाला बदलने में माहिर रहे हैं बिहार के नेता विपक्षी दलों में दलबदल का पुराना इतिहास

बिहार की सियासत में दलबदल का इतिहास पुराना रहा है। खासकर चुनावी मौसम में जाति, धर्म, क्षेत्रीय गणित और गठबंधन की संभावनाओं के बीच राजनेता पाला बदलते रहे हैं। अभी जहां राजद के 5 एमएलसी टूटकर जदयू में गए हैं, वहीं एक समय ऐसा भी था, जब राजद ने भाजपा और कम्युनिस्ट पार्टी के विधायकों को तोड़ा था। यह भी देखा गया है कि दलबदल करने वाले अधिकतर विपक्षी दलों से होते हैं। इस लिहाज से देखें तो बिहार में आसन्न विधानसभा चुनाव के मद्देनजर विपक्षी दलों के कुछ और नेता पाला बदलकर सत्तारूढ़ दलों में शामिल हो जाएं तो यह आश्चर्यजनक नहीं होगा।

बिहार में एक बड़े दलबदल की बानगी मंगलवार को दिखी। राजद के आठ में से पांच विधान परिषद सदस्यों ने पार्टी से अलग होकर जदयू का दामन थाम लिया। इससे पहले वर्ष 2014 में भी राजद के 13 विधायकों ने जावेद इकबाल अंसारी और सम्राट चौधरी के नेतृत्व में पाला बदलकर जदयू का दामन थाम लिया था। हालांकि अंसारी हाल ही में फिर राजद में लौटे हैं। इसके पहले लोजपा के दो विधायकों ने पार्टी का दामन छोड़ जदयू की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। पिछले साल रालोसपा से नाता तोड़कर दो विधायक और एक विधान पार्षद ने जदयू का दामन थाम लिया था।

सत्ता में रहते हुए राजद ने भी की सेंधमारी

बीते डेढ़ दशक में बिहार का राजनीतिक इतिहास देखें तो सबसे अधिक टूट राजद में ही हुई है, लेकिन डेढ़ दशक से पहले लालू-राबड़ी के कार्यकाल को देखें तो पार्टी तोड़ने में राजद का भी कोई सानी नहीं रहा है।

मौजूदा समय में दलबदल पर हायतौबा मचा रहा राजद एक समय भाजपा के दर्जनभर विधायकों को तोड़कर अपने दल में शामिल कर लिया था। उस समय अविभाजित बिहार था। यही नहीं सत्ता बचाने के लिए राजद ने अपने मित्र पार्टी होने के बाद भी कम्युनिस्ट पार्टी के विधायकों को अपने पाले में शामिल कर लिया था। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों के विधायकों को पार्टी में शामिल कर राजद ने सरकार चलाई थी। साफ है कि अभी विपक्षी दल होने के कारण राजद को भी उसी दौर से गुजरना पड़ रहा है जो उस समय की विपक्ष और मौजूदा समय की सत्तारूढ़ पार्टियों को गुजरना पड़ा था।

पाला बदलने में माहिर प्रमुख चेहरे

पाला बदलने में बिहार के कुछ नेता इस कदर चर्चित हो चुके हैं कि शायद ही उनका किसी पार्टी से दामन छुटा हो। इसमें नागमणि सबसे चर्चित चेहरा हैं। अब तक वे आधा दर्जन से अधिक पार्टियों में शामिल हो चुके हैं। इसी तरह अपनी पार्टी बना चुके हम सुप्रीमो पूर्व सीएम जीतन राम मांझी भी कई दलों में रह चुके हैं। वहीं, नरेन्द्र सिंह, सम्राट चौधरी, भगवान सिंह कुशवाहा, अरुण कुमार, लवली आनंद, महाचंद्र प्रसाद सिंह, रमई राम सहित कई और नेता हैं जो दो से अधिक दलों का दामन थाम चुके हैं।

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