लगेगी आग तो घर आएंगे कई ज़द में यहाँ पे सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है ।

विवेक अगर वक़ार होता तो ….????

घटना तक़रीबन डेढ़ दशक पहले की है।नोयडा का इंजीनियरिंग छात्र रणवीर सिंह उत्तराखंड घूमने गया था।जहाँ पुलिस ने एक फ़र्ज़ी मुठभेड़ में उसे मार गिराया।मीडिया में मामला उछला तो जाँच हुई और कई पुलिस अफसरों पर हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ।सिपाही से लेकर बड़े अधिकारी तक जेल गए।तब राष्ट्रीय सहारा उर्दू में एक बड़ा लेख छपा जिसका शीर्षक था …
रणवीर अगर तनवीर होता तो ?

पिछले दिनों अलीगढ़ में 2 मासूमों को एक फ़र्ज़ी मुठभेड़ में क़त्ल कर दिया गया।इस घटना का बाकायदा वीडियो भी बनाया गया।यह फ़र्ज़ी इनकाउंटर बड़ा मुद्दा बना।लेकिन जिसने भी इस क़त्ल पर सवाल उठाए उसे अपराधी का समर्थक घोषित कर दिया गया।दो मासूमो के कत्ल पर कुछ लोगों में जश्न भी मनाया।हद तो तब होगयी जब दिल्ली के कुछ नौजवान सामाजिक कार्यकर्ता इस मुद्दे पर बात करने अलीगढ़ के पुलिस अफसरों के पास पहुंचे तो उनके ऊपर भीड़ द्वारा कातिलाना हमला किया गया।किसी तरह यह लोग जान बचा कर भागने में सफल रहे।
अब ताज़ा मामला लखनऊ का है।जहाँ पुलिस ने विवेक तिवारी नाम के युवक को मुठभेड़ में मार गिराया।अभी 24 घण्टे भी नही हुए और साबित होगया की मुठभेड़ फ़र्ज़ी थी।पुलिस जवानों को सरकार ने बर्खास्त भी कर दिया है।अब ऐसे में मुझे 15 साल पहले राष्ट्रीय सहारा उर्दू की वो हेडिंग याद आ रही है ” रणवीर अगर तनवीर होता तो ”
मन मे एक सवाल भी उठ रहा है ..विवेक अगर वक़ार होता तो ??

लगेगी आग तो घर आएंगे कई ज़द में
यहाँ पे सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है ।

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